भारत की सबसे बड़ी साइबर ठगी, 23 करोड़ लूटे
अब एक खबर ऐसी है जो आपको सावधान करने वाली है। दिल्ली में एक पढ़े लिखे बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करके उनके साथ ₹3 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है।
जिस शख्स के साथ यह हैरान करने वाली ठगी का केस हुआ। वह खुद एक बैंकर रह चुके हैं। बैंकों के नियम कानून को अच्छी तरह जानते हैं, समझते हैं। इसके बाद भी वह ठगों के झांसे में आ गए, डर गए और ₹3 करोड़ अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। ₹3 करोड़ कोई छोटी रकम नहीं होती है।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर के मुताबिक साइबर क्राइम करने वालों ने नरेश मल्होत्रा नाम के शख्स से 22 करोड़ 92 लाख ठग लिए। 78 साल के नरेश मल्होत्रा कई बैंकों में काम कर चुके हैं।
फाइनेंसियल मैटर्स और मनी ट्रांजैक्शन का हिसाब किताब अच्छी तरह जानते हैं।
लेकिन वह साइबर ठगों के चक्कर में फंस गए और 4 अगस्त से 4 सितंबर के बीच उन्होंने ठगों के कहने पर 22 करोड़ 92 लाख अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। दरअसल इस ठगी की शुरुआत हुई 1 अगस्त से। दिल्ली के पौश इलाके गुलमोर पार्क में रहने वाले नरेश मल्होत्रा के लैंडलाइन फोन पर एक कॉल आया।
कॉल करने वाले ने खुद को Airtel के हेड क्वार्टर का कर्मचारी बताया और नरेश मल्होत्रा से कहा उनके आधार नंबर के जरिए फाइनेंशियल फ्रॉड हुआ है। इस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद और पैरगाम हमले में हुआ है। इसलिए उनके खिलाफ नॉन बिलेबल वारंट जारी हो गया है। अब आप सोचेंगे कि घोटाले की जानकारी Airtel का कर्मचारी क्यों देगा? यह सवाल नरेश मल्होत्रा के दिमाग में क्यों नहीं आया?
नरेश मल्होत्रा का कहना है उनके दिमाग में भी यह सवाल आया था। लेकिन साइबर क्रिमिनल्स ने फोन कॉल के साथ ही उन्हें कुछ डॉक्यूमेंट भेजे।
अंकित तिवारी नाम के किसी ईडी अफसर का आई कार्ड भेजा। इसके अलावा ईडी, सुप्रीम कोर्ट और रिजर्व बैंक के लेटर हेड से उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस फाइल होने की बात कही। लेटर हेड और आई कार्ड देखने में असली जैसे लग रहे थे। इसलिए नरेश मल्होत्रा घबरा गए।
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